Poetry 💗

एक नज़रिया ऐसा भी ।

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क्यों ना एक नया भगवान बनाया जाए ,
एक पत्थर की मुर्त को फिर तराशा जाए ।

उस पत्थर की मुर्त मे फिर ,
एक आत्मा का वास कराया जाए ।

क्यों ना एक नया भगवान बनाया जाए ..

आज उस भगवान को इंसान ,
का जीवन दिखाया जाए ।

उस आत्मा को थोड़ा ,
दर्द का एहसास कराया जाए ।

क्यों ना एक नया भगवान बनाया जाए ….

दिखाया जाए की कितना आसान है ,
भगवान बन जाना ।

और कितना कठिन है,
इंसान बनकर ये जीवन बिताना ।

क्या होता है जब कोई अपना ,
होजाता है दूर तड़प – तड़प कर ।

कैसा लगता है ,
सब कुछ पाकर खो देने पर ।

आज अपना दर्द सुनाया जाये ,
क्यों ना हर दर्द से भगवान को वाकीफ कराया जाए ।

क्यों ना एक नया भगवान बनाया जाए ….

आज उस भगवान को ,
सड़को की सैर कराई जाए ।

थोड़ी देर मंदिर ,
से बाहर निकाला जाए ।

दिखाया जाए उन गरीबो का दुख ,
उनकी थोड़ी तकलीफ सुनाई जाये ।

गरीबो के झोपड़े मे ,
क्यों ना एक रात बिताई जाए।

थोड़ा बचा कुचा खाना ,
गरीब की थाली से खाया जाए ।

क्या होता है रोटी कमाना ,
आज एक भगवान को सिखाया जाये।

चलो दर्द ना सही ,
उनका तुम पर अटूट विश्वास दिखाया जाये ।

क्यों ना एक नया भगवान बनाया जाए ….

आगे थोड़ी सड़क किनारे ,
भीख मांग रहे उस छोटे बचे से मिलवाया जाये ।

उस बचे का दुख उसकी ,
तकलीफ सुनाए जाये।

एक रुपये के लीये कड़कती धूप मे ,
एक गाड़ी से दूसरी गाड़ी जाकर रोना दिखाया जाये ।

बिन माँ की लोरी सुने सोना,
क्या होता है आज एक भगवान को बताया जाये।

चलो दर्द ना सही ,
उसके दर्द को चिपती वो मुस्कान दिखाई जाये।

क्यों ना एक नया भगवान बनाया जाए ….

ले जाया जाये ,
अमीरो की हवेली मै ।

हर कोने मे हो रहे ,
पाप को दिखाया जाये ।

हर तरीके के ,
ऐशो आराम दिखाए जाये।

और फिर पूछा जाये सिर्फ एक सवाल ,
बार बार , और हर बार ।

की क्यों भूल गए हमे ,
बनाकर तुम भगवान ।

की क्यों भूल गए हमे ,
बनाकर तुम भगवान ।

आज अपना दर्द सुनाया जाये ,
क्यों ना हर दर्द से भगवान को वाकीफ कराया जाए ।

क्यों ना आज एक नया भगवान बनाया जाये ।

      
                      – उन्नति मदान

………………………………………………………………..

I wrote this poem last night. My dad gave me the idea to write on this theme. And sorry I won’t be translating this one in English.
Thank you dad for making me write this poem and for giving it a nice title. I dedicate this one to you.

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23 thoughts on “एक नज़रिया ऐसा भी ।

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